फेमस होने के लिए दूसरों को बुली करती थी यह Instagram influencer

 

meethika dwivedi

अभी एक लड़की जो बहुत ज्यादा फेमस है, उसने विराट कोहली और बड़े-बड़े स्टार्स से मुलाकात की है। उसकी एक वीडियो वायरल हो रही है जिसमें वह बता रही है कि वह कैसे फेमस हुई। उन्होंने एक लड़की को टारगेट कर रखा था जिसका एक बॉयफ्रेंड था। अब वे सब उससे चिढ़ती थीं और उसको बुली करती थीं। उन्होंने उस वीडियो में बुली शब्द का इस्तेमाल तो नहीं किया, पर उनकी बातों से साफ-साफ पता चलता है कि वे उसको परेशान करती थीं और उसका मजाक बनाने के लिए वीडियो बनाती थीं, जो वायरल हो गई और वह फेमस हो गई। उसकी वीडियो देखकर मुझे एक पैटर्न दिखा जो हर बुली में होता है।

बुली की साइकोलॉजी और दिमागी सोच

बुली एक इंसान होता है जिसको घर में रिस्पेक्ट नहीं मिलती। हो सकता है उसका बाप उसको मारता हो या मां, भाई-बहन या परिवार में कोई उसे दबाता हो, लेकिन वह वहां कुछ कर नहीं पाता। हो सकता है जहां वह रहता है वहां उसका परिवार छोटा हो, जिससे पड़ोस वाले उनकी इज्जत न करते हों और मोहल्ले के बच्चे उसको परेशान करते हों।

इस इंटरव्यू को देखकर पता लगता है कि हमारे भारत में यह आम बात है कि लड़कियों को कैसे दबाकर रखा जाता है। उनको अनजान लड़कों से बात करने की परमिशन नहीं होती, खास करके गांवों में और ज्यादातर लड़कियों का यही हाल है। जब इन सबने देखा कि एक लड़की का बॉयफ्रेंड है, तो इनको अजीब लगा कि 'हमें तो परमिशन नहीं है, ये खुलेआम आशिकी लड़ा रहे हैं'। इनको वह लड़की अलग लगी। जब कोई इंसान मैजोरिटी (बहुमत) से हटकर कोई काम करता है जिसको लोग अच्छा नहीं मानते, तो लोग उसको बुली करने लगते हैं और उसका मजाक बनाने लगते हैं।

पर वे यह नहीं सोचते कि वह उसकी खुद की लाइफ है, वह कुछ भी करे उससे आपको दिक्कत नहीं होनी चाहिए जब तक वह कुछ गलत नहीं कर रहा या किसी को नुकसान नहीं पहुंचा रहा। वह किससे बात कर रही है, किससे शादी कर रही है, यह उसकी मर्जी है। अब ये लड़कियां उसको परेशान करती थीं और फिर उस पर वीडियो बनाती थीं—'निब्बा-निब्बी' वाला कंटेंट, जो बहुत वायरल होता था।

समाज की सोच और निब्बा-निब्बी कंटेंट का सच

इस कंटेंट का वायरल होना कोई बड़ी बात नहीं है क्योंकि हमारे देश में ज्यादातर लोगों का यही हाल है। वे अपने घर वालों के डर से अपने फैसले खुद नहीं लेते और जब कोई फैसला लेता है, तो उसकी 'निब्बा-निब्बी' बोलकर मजाक उड़ाते हैं। इन लोगों को अपोजिट जेंडर (विपरीत लिंग) के इंसान से बात करनी नहीं आती, उसको समझना नहीं आता और फिर बोलते हैं कि हमारे मां-बाप हमेशा लड़ते रहते हैं। क्या डोमेस्टिक वायलेंस में इंडिया नंबर 1 है?

घर वालों की मर्जी से शादी कर लेते हैं, किसी को इम्प्रेस करने में न तो मेहनत करनी पड़ी और न ही उसको समझा। अब शादी हो गई तो खुद को मालिक और दूसरे को गुलाम समझते हैं। मैं सबकी बात नहीं कर रहा, लेकिन 50% लोगों का यही हाल है। जो पहले दूसरों को निब्बा-निब्बी बोल रही थीं, अब वे खुद लव मैरिज करेंगी। अब वे लोग सबसे बड़े बेवकूफ हैं जो पहले उनके निब्बा-निब्बी वाले कंटेंट को पसंद करते थे।

अगर कोई किसी को ऑनलाइन बुली कर रहा है, तो पहले समझें कि वह किसे और किसलिए बुली कर रहा है और कंटेंट बना रहा है। इसके पीछे कारण क्या है? अगर हमें कोई बॉडी शेमिंग जोक मार रहा है, तो हमें उसको कॉल आउट करना होगा। जैसे कोई काला है या किसी की हाइट छोटी है, तो इसमें उसकी कोई गलती नहीं है। वह उसमें कुछ नहीं कर सकता। हां, अगर कोई मोटा है तो उस पर आप लिमिट में रहकर जोक मार सकते हैं क्योंकि मोटे से पतला हुआ जा सकता है।

बुली कौन होते हैं और उनका माइंडसेट

  • रियल लाइफ में पावरलेस (Powerless in Real Life): एक बुली अक्सर अपने घर, मोहल्ले या रिश्तों में दबाकर रखा जाता है। जब उसे अपनी जिंदगी में कोई कंट्रोल नहीं मिलता, तो वह दूसरों को दबाकर फर्जी पावर (Fake Power) महसूस करता है।
  • दबी हुई भावनाएं और जलन (Repression & Envy): जो आजादी या अधिकार उन्हें नहीं मिले (जैसे खुलकर बात करना या पार्टनर चुनना), जब वे किसी और को वह आजादी लेते देखते हैं, तो अंदर की जलन 'मोरल पुलिसिंग' (Moral Policing) बनकर बाहर आती है।
  • वैलिडेशन के भूखे (Hungry for Validation): उन्हें भीड़ से तालियां चाहिए होती हैं। उन्हें पता होता है कि समाज में मैजोरिटी लोग दबे हुए हैं, तो किसी का मजाक उड़ाकर वे आसानी से 'हीरो' बन सकते हैं।

बुली के पर्सनालिटी ट्रेट्स (Personality Traits)

  • दोहरा चरित्र (Hypocrisy): वे दूसरों को जिन बातों के लिए ट्रोल करते हैं (जैसे लव मैरिज या खुलकर बात करना), मौका मिलने पर खुद वही काम सबसे पहले करते हैं।
  • भीड़ पर निर्भरता (Mob Mentality): एक बुली कभी अकेला स्टैंड नहीं लेता। वह हमेशा भीड़ की आड़ में बोलता है ताकि उसे अकेले टारगेट न होना पड़े।
  • सहानुभूति की कमी (Lack of Empathy): उन्हें दूसरों की भावनात्मक चोट से फर्क नहीं पड़ता; उनके लिए किसी की सेल्फ-रिस्पेक्ट बस 2 मिनट का कंटेंट होती है।

बुली से कैसे बचें (ऑफलाइन और ऑनलाइन)

  • इमोशनल रिएक्शन न देना (Gray Rock Technique): बुली का ईंधन आपका गुस्सा या रोना होता है। अगर आप पूरी तरह न्यूट्रल हो जाएं और कोई भाव न दें, तो उनका मजाक फ्लॉप हो जाता है।
  • डिजिटल बाउंड्रीज और एल्गोरिदम को ब्लॉक करना: ऑनलाइन स्पेस में ट्रोल को रिप्लाई देना उन्हें रीच (Reach) देता है। ब्लॉक, रिपोर्ट और इग्नोर सबसे बड़ा हथियार है। कंटेंट क्रिएटर की सच्चाई को फैक्चुअल तरीके से कॉल आउट करें, न कि उनके लेवल पर जाकर गाली-गलौज करें।
  • उनका कंटेंट देखना बंद करें: समाज में जब तक हम ऐसे कंटेंट को 'एंटरटेनमेंट' समझकर शेयर करेंगे, तब तक बुलीज पैदा होते रहेंगे। ऐसे क्रिएटर को अनफॉलो और म्यूट करना ही उनकी पॉपुलैरिटी खत्म करता है।
  • अपना सपोर्ट ग्रुप स्ट्रॉन्ग रखें: उन लोगों के साथ रहें जो आपकी इंडिविजुअलिटी की रिस्पेक्ट करते हैं। बुली अक्सर अकेले लोगों को टारगेट करते हैं, इसलिए एक मजबूत बाउंड्री और सर्कल आपको मेंटली सेफ रखता है।

मेरा पर्सनल एक्सपीरियंस: स्कूल के दिनों की आपबीती

अब आप बोलोगे कि तुम यह कैसे बोल सकते हो, तो मैं तुमको अपना पर्सनल एक्सपीरियंस बताता हूं।

मैं जब स्कूल जाया करता था, तब मैं मोटा था और काला था। मैं 5वीं क्लास तक गांव में ही पढ़ा था और मैं अपने स्कूल में फर्स्ट आता था। यह बात अलग है कि मेरे स्कूल में 40 से 50 बच्चे ही होंगे और एक क्लास में 10 से 12 बच्चे होंगे। फिर मैंने आगे की पढ़ाई दूसरे स्कूल से की जो पास ही के गांव में था। वहां एक क्लास में करीब 50 बच्चे होंगे। वहां बच्चे मुझे परेशान करते थे। वहां मेरे गांव का कोई नहीं था और मैं उनके हिसाब से अजीब दिखता था।

वे मुझे नाम से नहीं बुलाते थे, वे मुझे 'कालू' बोलते थे—मास्टर के सामने भी। मेरी क्लास में कुछ बच्चे ऐसे भी थे जो बहुत होशियार थे और देखने में भी स्मार्ट थे, लेकिन वे मुझे कभी परेशान नहीं करते थे और न ही उनको मुझसे कोई मतलब था। मुझे जो बुली करते थे, वे बोलते थे कि पूरे स्कूल में तू सबसे काला है। मैं भी उनकी बात मानने लगा था और पूरे स्कूल में सबको ध्यान से देखता कि कहीं कोई मुझसे ज्यादा काला तो नहीं है। यही ढूंढने में मैं हर वक्त लगा रहता था और यह मानता था कि सच में काला होना बुरी बात है। इसका असर मेरी पढ़ाई पर भी पड़ रहा था और मैं पढ़ाई पर अच्छे से ध्यान नहीं लगा पा रहा था।

मेरे पास एक ड्रेस थी जिसको मैं रोज स्कूल पहनकर जाया करता था। मेरे साथ पढ़ने वाले बुली पेन की स्याही (ink) डालकर उसे गंदी कर देते थे। मेरी मां मुझसे पूछती थी कि यह कैसे हुआ, तो मैं बोलता था कि पेन उबल गया था इसलिए स्याही गिर गई। मेरी मां बहुत कोशिश करती थी उसे छुड़ाने की, पर वह नहीं उतरती थी। मैं वैसे ही उसे पहनकर जाया करता था और ड्रेस गंदी होने के कारण मैं स्कूल में रोज पिटता था। कभी प्रार्थना में पूरे स्कूल के सामने पिटता था।

मेरे स्कूल में क्या होता था कि सुबह-सुबह प्रार्थना के बाद प्रिंसिपल साहब सब बच्चों को चेक करते थे कि किसकी ड्रेस सही है, बाल बढ़े हैं या नहीं, नाखून कटे हैं या नहीं। मेरी ड्रेस पर स्याही के निशान होते थे, तो जब भी चेकिंग होती थी, मैं पिटता था। रोज चेकिंग नहीं होती थी, कभी क्लास में भी इसी वजह से पिटता था। मैं शिकायत करता था पर कोई कार्रवाई नहीं होती थी, वे छोड़ देते थे जैसे कोई बड़ी बात न हो। मैं घर पर इसलिए नहीं बताता था कि घर वाले फालतू में परेशान हो जाएंगे और घर की हालत खराब थी, इसलिए वे मुझे किसी प्राइवेट स्कूल में भी नहीं पढ़ा सकते थे क्योंकि फीस ज्यादा थी।

Bully करने वाले व्यक्ति की मानसिक स्थिति आमतौर पर गहराई में छिपी असुरक्षा, अनसुलझे गुस्से और भावनात्मक असंतुलन से जुड़ी होती है।

​मुख्य मनोवैज्ञानिक कारण और मानसिक स्थिति

​छिपी हुई असुरक्षा (Insecurity): कई लोग खुद को अंदर से कमजोर, अधूरा या कमतर महसूस करते हैं। दूसरों को नीचा दिखाकर वे अपनी कमियों को छिपाने और खुद को बेहतर महसूस कराने की कोशिश करते हैं।

​सहानुभूति की कमी (Lack of Empathy): ऐसे व्यक्तियों में दूसरों के दर्द या भावनाओं को महसूस करने की क्षमता बहुत कम होती है। उन्हें सामने वाले को पहुँचने वाले मानसिक या शारीरिक दर्द से फर्क नहीं पड़ता।

​नियंत्रण और वर्चस्व की चाह (Need for Control): अगर किसी का अपनी ज़िंदगी या घर के माहौल पर नियंत्रण नहीं होता, तो वह दूसरों पर हावी होकर और उन्हें डराकर अपनी ताकत का अहसास पाना चाहता है।

​खुद शोषण का शिकार होना (Cycle of Abuse): कई बार Bully करने वाले लोग खुद अपने घर, परिवार या अतीत में किसी हिंसा, सख्त व्यवहार या बुलिंग का शिकार रहे होते हैं। वही गुस्सा वे दूसरों पर निकालते हैं।

नार्सिसिज्म (Narcissism / अत्यधिक अहंकार): कुछ मामलों में व्यक्ति खुद को दूसरों से बहुत श्रेष्ठ समझता है। उसे लगता है कि वह दूसरों के साथ जैसा चाहे वैसा व्यवहार करने का हक रखता है।

​अटेंशन पाने की भूख (Attention-Seeking Behavior): ग्रुप में लोकप्रिय बनने, कूल दिखने या दूसरों का ध्यान अपनी तरफ खींचने के लिए भी कई लोग आक्रामक व्यवहार चुनते हैं।

​बुलिंग करना किसी व्यक्ति की शारीरिक या सामाजिक ताकत की निशानी नहीं, बल्कि उसके अंदर छिपी मानसिक कमजोरी और भावनात्मक समस्याओं का संकेत होता है।


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