Multiple Personality Disorder (DID) क्या है? लक्षण, कारण और इलाज की पूरी जानकारी
Multiple Personality Disorder (DID) क्या है? (What is DID in Hindi)
मल्टीपल पर्सनैलिटी डिसऑर्डर के मुख्य लक्षण (Symptoms of DID)
Amnesia (याददाश्त जाना): अपनी निजी जानकारी या दिनभर की घटनाओं को भूल जाना।
DID होने के मुख्य कारण (Causes of Multiple Personality Disorder)
एक शरीर और 10 अलग लोग? Multiple Personality Disorder का वो सच जो रोंगटे खड़े कर देगा
कभी सोचा है कि आपका कोई दोस्त अचानक बदल जाए? मतलब थोड़ी देर के लिए नहीं, बल्कि एकदम अलग ही इंसान बन जाए। उसका बोलने का ढंग, उसकी आंखें, यहाँ तक कि उसकी 'Energy' और 'Power' भी बदल जाए। हम लोग अक्सर इसे देख कर डर जाते हैं, बोलते हैं कि "भूत प्रेत का साया है" या "ऊपर की हवा है"। पर सच तो ये है कि ये सब हमारे दिमाग का एक बहुत ही दर्दनाक खेल है। इस बीमारी को Psychology की दुनिया में DID (Dissociative Identity Disorder) या Multiple Personality Disorder कहते हैं। असलियत में ये किसी 'भूत' की नहीं, बल्कि 'Trauma' और टूटे हुए दिमाग की कहानी है।
1. एक दर्दनाक कहानी: जब बचपन ही नरक बन गया (Case Study)
चलो, इसे गहराई से समझने के लिए एक लड़की की बात करते हैं, मान लो उसका नाम है 'रिया'। रिया आज 24 साल की है और बहुत 'Introvert' (शांत) रहती है। पर उसके साथ बचपन में जो हुआ, वो सुन कर आपका कलेजा फट जाएगा। जब रिया सिर्फ 6 साल की थी, उसके घर का ही एक 'Close Relative', जिस पर सब 'Trust' करते थे, उसने रिया के साथ बहुत 'गंदी हरकत' (Child Abuse) की। ये सिलसिला महीनों तक चला।
वो मासूम बच्ची किसी को बता नहीं सकती थी क्योंकि उसे डराया गया था। जब भी वो आदमी कमरे में आता, रिया का दिमाग डर से फटने लगता। उस छोटी सी बच्ची के पास बचने का, या वहाँ से भागने का कोई 'Option' नहीं था। तो उस मासूम दिमाग ने ख़ुद को बचाने के लिए एक 'Defense Mechanism' तैयार किया।
दिमाग ने सोचा—"अगर रिया ये 'Pain' नहीं सह सकती, तो क्यों न एक नया इंसान बना दिया जाए जो उस दर्द को झेल सके और रिया को बचा सके?"
उसी पल रिया के अंदर से 'Sherry' नाम की एक 'Personality' पैदा हुई। Sherry निडर थी, उसकी आवाज़ भारी थी, और उसे दर्द महसूस नहीं होता था। जब भी वो आदमी रिया के पास आता, असली रिया दिमाग के किसी कोने में 'Switch off' या 'Dissociate' हो जाती और Sherry बाहर आ जाती। वो आदमी जो भी करता, वो Sherry के साथ होता। असली रिया को लगता कि वो बस कोई बुरा सपना देख रही है।
आज रिया बड़ी हो गई है, पर उसके अंदर Sherry आज भी 'Active' है। कभी-कभी रिया 'Office' में होती है और अचानक Sherry 'Control' ले लेती है। रिया को याद ही नहीं रहता कि पिछले 4 घंटे में वो कहाँ गई और किससे लड़ी। इसे Psychology में 'Blackout' या 'Amnesia' कहते हैं। रिया के लिए उसका अपना शरीर ही एक जेल बन गया है जिसमें Sherry के अलावा 4 और लोग (Alters) कैद हैं।
2. दिमाग आख़िर ख़ुद को क्यों बाँटता है? (Science of Dissociation)
हमारा दिमाग बचपन में कांच जैसा होता है। Science के अनुसार, 9 साल की उम्र तक हमारी 'Personality' एक पूरी 'Plate' की तरह जुड़ती है (Integration)। लेकिन अगर उससे पहले कोई बहुत बड़ा धक्का या 'Trauma' लगे (जैसे Physical या Sexual Abuse), तो वो प्लेट जुड़ने से पहले ही बिखर जाती है।
दिमाग उन बिखरे हुए टुकड़ों को अलग-अलग डिब्बों में बंद कर देता है ताकि बच्चा ज़िंदा रह सके और 'Normal' बर्ताव कर सके। ये जो अलग-अलग 'Identity' बनती हैं, इन्हें Psychology में 'Alters' (अल्टर) कहते हैं। हर Alter का अपना एक 'Fix Role' होता है। कोई 'Protector' (रक्षक) होता है जो ग़ुस्सा करता है और लड़ने को तैयार रहता है। कोई 'Child Alter' होता है जो आज भी उसी 5 साल की उम्र में अटका है और डर के मारे रोता रहता है। कोई ऐसा भी होता है जो ख़ुद को नुकसान (Self-harm) पहुँचाना चाहता है क्योंकि उसे लगता है कि ये सब 'Abuse' उसी की ग़लती थी।
3. लड़कियों में ही ये ज़्यादा क्यों मिलता है? (The Dark Reality)
ये एक बहुत कड़वा सच है कि DID के 'Patients' में 90% से ज़्यादा महिलाएँ (Females) होती हैं। क्या महिलाओं का दिमाग कमज़ोर होता है? बिल्कुल नहीं! इसका असली 'Reason' हमारा समाज है। लड़कियों के साथ बचपन में 'Sexual Abuse' और घरेलू हिंसा के 'Cases' लड़कों से कहीं ज़्यादा होते हैं।
ऊपर से हमारे समाज में लड़कियों को बचपन से ही सिखाया जाता है कि "सहना सीखो", "चुप रहो" और "आवाज़ मत उठाओ"। जब वो बच्ची अपना ग़ुस्सा और दर्द 'Express' नहीं कर पाती, तो उसका दिमाग अंदर ही अंदर 'Pressure Cooker' की तरह फटने लगता है। वो अपनी 'Reality' से 'Escape' करने के लिए ख़ुद को कई हिस्सों में बांट लेती है।
इसलिए महिलाओं में ये बीमारी बहुत ज़्यादा दिखती है। पुराने ज़माने में अनपढ़ लोग इसे 'देवी आना' या 'भूत चढ़ना' कहते थे, लेकिन 'Modern Psychology' जानती है कि ये सिर्फ़ एक मासूम बच्ची का बिखरा हुआ दिमाग है जिसे किसी 'Abuser' ने तोड़ दिया।
Jeni Haynes: वो लड़की जिसके शरीर में 2500 लोग छुपकर रहते थे (एक सच्ची कहानी)
यह कहानी है ऑस्ट्रेलिया की रहने वाली Jeni Haynes की। यह 'News' की दुनिया में अब तक का सबसे अनोखा और दर्दनाक मामला माना जाता है। जब जेनी सिर्फ 4 साल की थी, तब से उसके अपने सगे बाप (Richard Haynes) ने उसके साथ वो 'दरिंदगी' शुरू की जिसे शब्दों में बयान करना नामुमकिन है। यह 'Abuse' अगले 10 सालों तक हर दिन चला।
इतने छोटे मासूम बच्चे के लिए वो 'Pain' (दर्द) इतना ज़्यादा था कि उसका दिमाग फटने लगा। जेनी के दिमाग ने उस दर्द से बचने के लिए ख़ुद को टुकड़ों में बाँटना शुरू कर दिया। जेनी के अंदर एक या दो नहीं, बल्कि कुल 2,500 अलग-अलग पहचानें (Alters) बन गईं!
जेनी बताती है कि जब भी उसका बाप उसके साथ 'गलत काम' करने आता, जेनी 'गायब' हो जाती और उसकी जगह 4 साल का एक छोटा लड़का 'Symphony' बाहर आ जाता था। Symphony ने जेनी का सारा दर्द अपने ऊपर ले लिया ताकि असली जेनी सुरक्षित रह सके।
कोर्ट का फैसला: साल 2019 में, जब जेनी 49 साल की हुई, उसने अपने बाप पर केस किया। इतिहास में पहली बार कोर्ट ने जेनी की इन 'Multiple Personalities' की गवाही को 'Evidence' (सबूत) के तौर पर माना। जेनी के अंदर की अलग-अलग आवाज़ों ने कोर्ट में खड़े होकर बताया कि उस दिन उनके साथ क्या-क्या हुआ था।
जेनी के बाप को 45 साल की जेल हुई। यह केस साबित करता है कि इंसान का दिमाग 'Trauma' से बचने के लिए किस हद तक जा सकता है। जेनी आज भी उन 2500 लोगों के साथ जी रही है, लेकिन अब वो 'Safe' है।
जेनी की ये कहानी हमें सिखाती है कि 'Multiple Personality Disorder' कोई नाटक नहीं, बल्कि एक मज़बूत इंसान की 'Survival' (ज़िंदा रहने) की कहानी है। जेनी का कहना है कि—"मेरे उन 2500 दोस्तों ने मिलकर मुझे उस नरक से बाहर निकाला है।"
4. एक ही शरीर में अलग-अलग उम्र के लोग? (The System of Alters)
सबसे 'Shocking' बात पता है क्या है? ये जो अलग-अलग 'Identities' (Alters) बनती हैं, ये सिर्फ़ नाम या कोई 'Acting' नहीं होते। एक DID के 'Patient' के अंदर एक 5 साल का बच्चा हो सकता है जो आज भी डर के मारे रोता है, एक 50 साल का ग़ुस्से वाला आदमी हो सकता है, और एक ऐसी लड़की भी हो सकती है जो बहुत 'Modern' हो।
इन सबकी आवाज़ अलग होती है, इनके चलने का 'Style' अलग होता है, और यहाँ तक कि इनकी 'Medical Condition' भी अलग हो सकती है। हो सकता है 'Main Personality' को चश्मा लगता हो, पर जब दूसरी 'Personality' (Alter) बाहर आये तो उसे बिना चश्मे के सब एकदम 'Clear' दिखता हो। इसे ही Science में दिमाग की 'Superpower' कहा जाता है, जो शरीर को 'Trauma' से बचाने के लिए 'Biologically' भी बदल देती है।
दिमाग के वो 4 रक्षक (Types of Alters)
DID में हर 'Alter' का एक 'Fix Task' होता है:
1. The Host: ये वो असली इंसान है जिसे दुनिया जानती है। ये अक्सर 'Depressed', थका हुआ रहता है और इसे अपनी 'Memory Loss' का पता नहीं होता।
2. The Protector (रक्षक): ये 'Aggressive' (ग़ुस्से वाला) होता है। इसका काम 'Host' को किसी भी ख़तरे या 'Abuser' से बचाना होता है। ये दर्द भी आसानी से सह लेता है।
3. The Little (बच्चा): ये 'Alter' उसी उम्र में अटक जाता है जब 'Trauma' हुआ था। ये आज भी उसी अंधेरे कमरे में डर रहा होता है और इसे प्यार की ज़रूरत होती है।
4. The Persecutor: ये सबसे ख़तरनाक होता है। ये अक्सर ख़ुद को 'Harm' (चोट) पहुँचाता है क्योंकि इसे लगता है कि बचपन में जो कुछ भी बुरा हुआ, वो उसी की ग़लती थी।
5. Gen Z और Millennials: क्या आजकल ये बीमारी ज़्यादा फैल रही है?
आजकल 'Social Media' (जैसे Instagram, YouTube) पर DID के बहुत 'Cases' और 'Videos' सामने आ रहे हैं। लोग सोचते हैं कि क्या ये कोई नया 'Trend' है या 'Gen Z' की कोई नई नौटंकी है? असलियत ये है कि 'Gen Z' और 'Millennials' इतिहास की सबसे 'Aware' (जागरूक) पीढ़ी है।
पुराने ज़माने में जब किसी लड़की के साथ ऐसा होता था, तो घर वाले उसे 'Tantrik' के पास ले जाते थे। लोग बोलते थे कि इस पर भूत चढ़ गया है। बेचारी लड़कियों को ज़ंजीरों से बांध दिया जाता था। लेकिन आज की 'Generation' पढ़ी-लिखी है। वो 'Mental Health' को समझती है। आज के युवा जान गए हैं कि ये "भूत" नहीं, बल्कि 'Childhood Trauma' का नतीजा है। इसीलिए आज लोग छुपने के बजाय 'Doctor' के पास जा रहे हैं और अपने 'Mental Issues' पर खुलकर बात कर रहे हैं।
6. क्या इसका इलाज मुमकिन है? (Treatment & Reality)
DID का कोई जादू-मंतर वाला इलाज नहीं है। कोई ऐसी 'Pill' (गोली) नहीं बनी जो रातों-रात 10 लोगों को दिमाग से मिटा दे। इसका असली और इकलौता इलाज है 'Talk Therapy'।
एक 'Patient' को सालों तक 'Psychologist' के साथ बैठ कर अपने पुराने 'Trauma' को दोबारा 'Process' करना पड़ता है। 'Therapist' का असली 'Goal' होता है उन बिखरे हुए टुकड़ों (Alters) को मनाना कि अब वे 'Safe' हैं और उन्हें आपस में मिलकर रहना होगा। इसे Psychology में 'Integration' कहते हैं। मतलब सभी 'Personalities' को जोड़ कर फिर से एक पूरी 'Plate' बनाना। कई 'Patients' सालों की 'Therapy' के बाद बिल्कुल ठीक हो जाते हैं, और कई अपने इन 'Alters' के साथ एक 'Team' की तरह जीना सीख लेते हैं (जिसे Functional Multiplicity कहते हैं)।
आख़िरी बात: वो पागल नहीं, वो घायल है!
अगर आपको अपनी 'Life' में कोई ऐसा इंसान मिले जो अचानक बदल जाता हो या जिसे बहुत सी बातें याद न रहती हों, तो उसे 'पागल' बोल कर उसका मज़ाक मत उड़ाना। वो इंसान उस दर्द से गुज़र रहा है जो हम और आप इमेजिन भी नहीं कर सकते। उसका शरीर एक है, पर उसके अंदर हज़ारों दर्द भरी यादें और ज़ख़्मी लोग कैद हैं। उसे 'Society' के तानों से ज़्यादा हमारे 'Support' और प्यार की ज़रूरत है।
कुछ ज़रूरी सवाल (FAQs)
Q1: क्या फिल्मों की तरह DID के Patient ख़तरनाक (Dangerous) होते हैं?
Ans: बिल्कुल नहीं ! फिल्मों (जैसे 'Split' या 'Bhool Bhulaiyaa') में इन्हें 'Villain' दिखाया जाता है 'Suspense' के लिए। 'Real Life' में ये लोग ख़तरनाक नहीं होते। ये ख़ुद इतने डरे हुए होते हैं कि इन्हें दूसरों से ज़्यादा ख़ुद से 'Danger' होता है।
Q2: क्या DID एक 'Genetic' बीमारी है (पीढ़ी दर पीढ़ी)?
Ans: नहीं। ये आपके DNA में नहीं होती। ये पूरी तरह से 'Environment' और बचपन के गहरे 'Trauma' (जैसे Abuse या Violence) की वजह से 'Develop' होती है।
Q3: क्या एक इंसान को पता होता है कि उसके अंदर 'दूसरे' लोग हैं?
Ans: शुरुआत में बिल्कुल नहीं। सालों तक इंसान इसे 'Memory Loss' या 'Blackout' समझता रहता है। जब 'Therapy' शुरू होती है और 'Diagnosis' होता है, तब जाकर 'Main Personality' को अपने 'Alters' का एहसास होता है।

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